100+ Rahat Indori Shayari और ग़ज़ल In Hindi [2020]

100+ Rahat Indori Shayari और ग़ज़ल In Hindi [2020]- हेलो फ्रेंड्स स्वागत है आपका हमारी हिंदी वेबसाइटthehindisupport.com पर दोस्तों राहत इन्दोरी को सभी जानते है और उनके शायरी और शायरी कहने का अंदाज़ सबसे ज्यादा जुदा है। बैसे तो इन्दोरी शाहब को दुनिया जानती है क्यूंकि राहत इन्दोरी साहब एक इंटरनेशनल शायर हैं। Rahat Indori Shayari 

आज के आर्टिकल में हम आपके लिए लेकर आये हैं राहत इन्दोरी शाहब की 100 सबसे अच्छी शायरी कलेक्शन। अगर आपको हमारा ये शायरी कलेक्शन पसंद आये तो हमें निचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताएं।,,,,,,Rahat Indori Shayari

राहत इंदौरी शायरी In Hindi .

  • अब ना मैं हूँ ,ना बाकी हैं ज़माने मेरे
    फिर भी मशहूर हैं ,शहरों में फ़साने मेरे
    जिंदगी है तो नए ज़ख्म भी लग जायेंगे
    अब भी बाकी हैं कई दोस्त पुराने मेरे

Sad शायरी (New Collection) 2020 हिंदी में। Latest Sad Shayari In Hindi

  • गुलाब, ख्वाब, दवा, ज़हर, जाम क्या क्या हैं
    में आ गया हु बता इंतज़ाम क्या क्या हैं
    फ़क़ीर, शाह, कलंदर, इमाम क्या क्या हैं
    तुझे पता नहीं तेरा गुलाम क्या क्या हैं|

100+Happy Birthday सन्देश 2020। Shayari Quotes और Status

  • हर एक हर्फ़ का अंदाज़ बदल रखा हैं
    आज से हमने तेरा नाम ग़ज़ल रखा हैं
    मैंने शाहों की मोहब्बत का भरम तोड़ दिया
    मेरे कमरे में भी एक “ताजमहल” रखा हैं|

 

  • लू भी चलती थी तो बादे-शबा कहते थे,
    पांव फैलाये अंधेरो को दिया कहते थे,
    उनका अंजाम तुझे याद नही है शायद,
    और भी लोग थे जो खुद को खुदा कहते थे।

 

  • हाथ ख़ाली हैं तेरे शहर से जाते जाते,
    जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते,
    अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है,
    उम्र गुज़री है तेरे शहर में आते जाते।

 

  • चेहरों के लिए आईने कुर्बान किये हैं,
    इस शौक में अपने बड़े नुकसान किये हैं,​
    महफ़िल में मुझे गालियाँ देकर है बहुत खुश​,
    जिस शख्स पर मैंने बड़े एहसान किये है।

 

  • ​तेरी हर बात ​मोहब्बत में गँवारा करके​,
    ​दिल के बाज़ार में बैठे हैं खसारा करके​,
    ​मैं वो दरिया हूँ कि हर बूंद भंवर है जिसकी​,​​
    ​तुमने अच्छा ही किया मुझसे किनारा करके।

 

  • आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो,
    ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो,
    एक ही नदी के हैं ये दो किनारे दोस्तो,
    दोस्ताना ज़िंदगी से मौत से यारी रखो।

 

  • अजीब लोग हैं मेरी तलाश में मुझको,
    वहाँ पर ढूंढ रहे हैं जहाँ नहीं हूँ मैं,
    मैं आईनों से तो मायूस लौट आया था,
    मगर किसी ने बताया बहुत हसीं हूँ मैं।

 

  • अजनबी ख़्वाहिशें सीने में दबा भी न सकूँ,
    ऐसे ज़िद्दी हैं परिंदे कि उड़ा भी न सकूँ,
    फूँक डालूँगा किसी रोज़ मैं दिल की दुनिया,
    ये तेरा ख़त तो नहीं है कि जला भी न सकूँ।

 

  • रोज़ तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है,
    चाँद पागल है अँधेरे में निकल पड़ता है,
    रोज़ पत्थर की हिमायत में ग़ज़ल लिखते हैं,
    रोज़ शीशों से कोई काम निकल पड़ता है।

 

  • उसे अब के वफ़ाओं से गुजर जाने की जल्दी थी,
    मगर इस बार मुझ को अपने घर जाने की जल्दी थी,
    मैं आखिर कौन सा मौसम तुम्हारे नाम कर देता,
    यहाँ हर एक मौसम को गुजर जाने की जल्दी थी।

राहत इंदौरी दो लाइन शायरी In Hindi 

  • मैंने अपनी खुश्क आँखों से लहू छलका दिया,
    इक समंदर कह रहा था मुझको पानी चाहिए।

 

  • बहुत गुरूर है दरिया को अपने होने पर,
    जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाएँ।

 

  • आते जाते हैं कई रंग मेरे चेहरे पर,
    लोग लेते हैं मजा ज़िक्र तुम्हारा कर के।

 

  • अब हम मकान में ताला लगाने वाले हैं
    पता चला हैं की मेहमान आने वाले हैं

 

  • राह के पत्थर से बढ के, कुछ नहीं हैं मंजिलें
    रास्ते आवाज़ देते हैं, सफ़र जारी रखो

 

  • जागने की भी, जगाने की भी, आदत हो जाए
    काश तुझको किसी शायर से मोहब्बत हो जाए

 

  • सूरज, सितारे, चाँद मेरे साथ में रहें
    जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहेंशाखों से टूट जाए वो पत्ते नहीं हैं हम
    आंधी से कोई कह दे की औकात में रहें

 

राहत इंदौरी Best Shayari In Hindi 2020 

 

1. सफ़र की हद है वहां तक की कुछ निशान रहे
चले चलो की जहाँ तक ये आसमान रहे,

2. ये क्या उठाये कदम और आ गयी मंजिल
मज़ा तो तब है के पैरों में कुछ थकान रहे,

3. वो शख्स मुझ को कोई जालसाज़ लगता हैं
तुम उसको दोस्त समझते हो फिर भी ध्यान रहे,

4. मुझे ज़मीं की गहराइयों ने दबा लिया
मैं चाहता था मेरे सर पे आसमान रहे,

5. अंदर का ज़हर चूम लिया, धूल के आ गए
कितने शरीफ लोग थे सब खुल के आ गए,

6. सूरज से जंग जीतने निकले थे बेवकूफ
सारे सिपाही माँ के थे घुल के आ गए,

6. सूरज से जंग जीतने निकले थे बेवकूफ
सारे सिपाही माँ के थे घुल के आ गए,

7. मस्जिद में दूर दूर कोई दुसरा न था
हम आज अपने आप से मिल जुल के आ गये,

8. सूरज ने अपनी शक्ल भी देखि थी पहली बार
आईने को मजे भी मुक़ाबिल के आ गए,

9. समन्दरों में मुआफिक हवा चलाता है
जहाज़ खुद नहीं चलते खुदा चलाता है,

10. ये जा के मील के पत्थर पे कोई लिख आये
वो हम नहीं हैं, जिन्हें रास्ता चलाता है,

 

राहत की इंदौरी शायरी हिंदी में 

कभी महक की तरह हम गुलों से उड़ते हैं
कभी धुएं की तरह पर्वतों से उड़ते हैं

ये केचियाँ हमें उड़ने से खाक रोकेंगी
की हम परों से नहीं हौसलों से उड़ते हैं

मिरी ख़्वाहिश है कि आँगन में न दीवार उठे
मिरे भाई मिरे हिस्से की ज़मीं तू रख ले

न हम-सफ़र न किसी हम-नशीं से निकलेगा
हमारे पाँव का काँटा हमीं से निकलेगा

मैं पर्बतों से लड़ता रहा और चंद लोग
गीली ज़मीन खोद के फ़रहाद हो गए

मज़ा चखा के ही माना हूँ मैं भी दुनिया को
समझ रही थी कि ऐसे ही छोड़ दूँगा उसे

नए किरदार आते जा रहे हैं
मगर नाटक पुराना चल रहा है

रोज़ पत्थर की हिमायत में ग़ज़ल लिखते हैं
रोज़ शीशों से कोई काम निकल पड़ता है

वो चाहता था कि कासा ख़रीद ले मेरा
मैं उस के ताज की क़ीमत लगा के लौट आया

ये हवाएँ उड़ न जाएँ ले के काग़ज़ का बदन
दोस्तो मुझ पर कोई पत्थर ज़रा भारी रखो

ये ज़रूरी है कि आँखों का भरम क़ाएम रहे
नींद रक्खो या न रक्खो ख़्वाब मेयारी रखो

बोतलें खोल कर तो पी बरसों
आज दिल खोल कर भी पी जाए

दोस्ती जब किसी से की जाए
दुश्मनों की भी राय ली जाए

एक ही नद्दी के हैं ये दो किनारे दोस्तो
दोस्ताना ज़िंदगी से मौत से यारी रखो

रोज़ तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है
चाँद पागल है अँधेरे में निकल पड़ता है

शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम
आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे

उस की याद आई है साँसो ज़रा आहिस्ता चलो
धड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है
राहत इंदौरी शायरी लिरिक्स

जवानिओं में जवानी को धुल करते हैं
जो लोग भूल नहीं करते, भूल करते हैं

अगर अनारकली हैं सबब बगावत का
सलीम हम तेरी शर्ते कबूल करते हैं
राहत इन्दौरी शेर

आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो
ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो

अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है
उम्र गुज़री है तिरे शहर में आते जाते

बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाएँ

बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए
मैं पीना चाहता हूँ पिला देनी चाहिए

डॉ. राहत इंदौरी ग़ज़ल In Hindi 

 

  • अभी गनीमत है सब्र मेरा, अभी लबालब भरा नहीं हूंवो मुझको मुर्दा समझ रहा है, उसे कहो मैं मरा नहीं हूं.

    वो कह रहा है कि कुछ दिनों में मिटा के रख दूंगा नस्ल तेरी

    है उसकी आदत डरा रहा है, है मेरी फितरत डरा नहीं हूं

1 .सारी बस्ती क़दमों में है Gazal Rahat Indori

सारी बस्ती क़दमों में है, ये भी इक फ़नकारी है
वरना बदन को छोड़ के अपना जो कुछ है सरकारी है
कालेज के सब लड़के चुप हैं काग़ज़ की इक नाव लिये
चारों तरफ़ दरिया की सूरत फैली हुई बेकारी है
फूलों की ख़ुश्बू लूटी है, तितली के पर नोचे हैं
ये रहजन का काम नहीं है, रहबर की मक़्क़ारीहै
हमने दो सौ साल से घर में तोते पाल के रखे है
मीर तक़ी के शेर सुनाना कौन बड़ी फ़नकारी है
अब फिरते हैं हम रिश्तों के रंग-बिरंगे ज़ख्म लिये
सबसे हँस कर मिलना-जुलना बहुत बड़ी बीमारी है
दौलत बाज़ू हिकमत गेसू शोहरत माथा गीबत होंठ
इस औरत से बच कर रहना, ये औरत बाज़ारी है
कश्ती पर आँच आ जाये तो हाथ कलम करवा देना
लाओ मुझे पतवारें दे दो, मेरी ज़िम्मेदारी है…,,,,,,,,,,,,,,Rahat Indori Shayari
2 .घर से ये सोच कर निकला हूँ की मर जाना है। ग़ज़ल 

घर से ये सोच के निकला हूं कि मर जाना है
अब कोई राह दिखा दे कि किधर जाना है

जिस्म से साथ निभाने की मत उम्मीद रखो
इस मुसाफ़िर को तो रस्ते में ठहर जाना है

मौत लम्हे की सदा ज़िंदगी उम्रों की पुकार
मैं यही सोच के ज़िंदा हूं कि मर जाना है

नशा ऐसा था कि मयख़ाने को दुनिया समझा
होश आया तो ख्या‍ल आया कि घर जाना है

मिरे जज़्बे की बड़ी क़द्र है लोगों में मगर
मेरे जज़्बे को मिरे साथ ही मर जाना है

 

टॉप शायरी राहत इंदौरी हिंदी में 

  • मैं लाख कह दूं कि आकाश हूं ज़मीं हूं मैं
    मगर उसे तो ख़बर है कि कुछ नहीं हूं मैंअजीब लोग हैं मेरी तलाश में मुझ को
    वहां पे ढूंढ रहे हैं जहां नहीं हूं मैं

 

  • जवानिओं में जवानी को धुल करते हैं
    जो लोग भूल नहीं करते, भूल करते हैंअगर अनारकली हैं सबब बगावत का
    सलीम हम तेरी शर्ते कबूल करते हैं,,,,,,Rahat Indori Shayari 

 

  • नए सफ़र का नया इंतज़ाम कह देंगे
    हवा को धुप, चरागों को शाम कह देंगेकिसी से हाथ भी छुप कर मिलाइए
    वरना इसे भी मौलवी साहब हराम कह देंगे

 

  • मुझसे पहले वो किसी और की थी, मगर कुछ शायराना चाहिये था,
    चलो माना ये छोटी बात है, पर तुम्हें सब कुछ बताना चाहिये था|

 

बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए Gazal Rahat Indori 

  • बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए
    मैं पीना चाहता हूं पिला देनी चाहिए,,,,,,,,,,Rahat Indori Shayari अल्लाह बरकतों से नवाज़ेगा इश्क़ में
    है जितनी पूंजी पास लगा देनी चाहिए

    दिल भी किसी फ़क़ीर के हुजरे से कम नहीं
    दुनिया यहीं पे ला के छुपा देनी चाहिए

    मैं ख़ुद भी करना चाहता हूं अपना सामना
    तुझ को भी अब नक़ाब उठा देनी चाहिए

    मैं फूल हूं तो फूल को गुलदान हो नसीब
    मैं आग हूं तो आग बुझा देनी चाहिए

    मैं ताज हूं तो ताज को सर पर सजाएं लोग
    मैं ख़ाक हूं तो ख़ाक उड़ा देनी चाहिए

    मैं जब्र हूं तो जब्र की ताईद बंद हो
    मैं सब्र हूं तो मुझ को दुआ देनी चाहिए

    मैं ख़्वाब हूं तो ख़्वाब से चौंकाइए मुझे
    मैं नींद हूं तो नींद उड़ा देनी चाहिए

    सच बात कौन है जो सर-ए-आम कह सके
    मैं कह रहा हूं मुझ को सज़ा देनी चाहिए,,,,,,,,Rahat Indori Shayari 

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